भागलपुर में दिखा दस टांगों वाला दुर्लभ टारेंटयुला मकड़ी.. शिकार में करती है अपना जहर का उपयोग

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भागलपुर में दिखा दस टांगों वाला दुर्लभ टारेंटयुला मकड़ी
भागलपुर में दिखा दस टांगों वाला दुर्लभ टारेंटयुला मकड़ी

भागलपुर में दिखा दस टांगों वाला दुर्लभ टारेंटयुला मकड़ी

दस टांगों वाला दुर्लभ टारेंटयुला मकड़ी भागलपुर में दिखाई दी है। इस मकड़ी का आकार बड़ा, शरीर में रोआ, दो भागों में शरीर बंटा हुआ है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह मूलत: आस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड का रहने वाला है और भागलपुर के नाथनगर में वर्षों बाद देखा गया है। नाथनगर के कंझिया निवासी संतोष के आवास पर यह मकड़ी रविवार को दिखी थी। इसके बाद उन्होंने इसकी सूचना भारतीय वन्यजीव संस्थान के गंगा प्रहरी स्पेयरहेड दीपक कुमार को दी।

हालांकि दीपक का दावा है कि भागलपुर में इसे पहली बार देखा गया है। यह क्यों आया और कब से इस क्षेत्र में मौजूद है यह अनुसंधान का विषय है। आजकल इस मकड़ी को हिन्दी व अंग्रेजी फिल्मों में खूब दिखाया जा रहा है। कुछ समय पहले आयी हाउसफुल 4 फिल्म में कलाकार अक्षय कुमार कई दफा इस मकड़ी के साथ दिखे थे। उन्होंने बताया कि यह पेड़ के जड़, चट्टान के नीचे व जमीन के अंदर अपना आवास बनाता है। यह एक साल में दो हजार कीड़े तक खाती है। देश में मकड़ी की 1684 व दुनिया में 45654 प्रजातियां पायी जाती है। उन्होंने बताया कि मकड़ियों का जैव विविधता में महत्वपूर्ण योगदान होता है यह बड़ी संख्या में कीटों को नियंत्रित करने में भी अपना योगदान देते हैं। उधर वन प्रमंडल पदाधिकारी भरत चिंता पल्ली ने बताया कि यह अब राज्य में स्थानीय रूप में पाने जाने लगा ह। भागलपुर में वर्षों बाद यह दिखाई दी है।

एक सेंटीमीटर लंबे होते हैं टारेंटयुला मकड़ी:

गंगा प्रहरी स्पेयरहेड ने बताया कि टारेंटयुला मकड़ी एक सेंटीमीटर लंबे होते हैं। इसके पैर मोटे होते हैं जो शक्तिशाली व विषैला होते हैं। इसका शरीर छह सेंटीमीटर (2.4 इंच) का है। इसके टांगों का फैलाव 16 सेंटीमीटर (6.3 इंच) या एक आदमी के हाथ के आकार से बड़ा होता है।

शिकार में करती है अपना जहर का उपयोग:

टारेंटयुला के काटने से हालांकि जान नहीं जाती है, लेकिन छह घंटे तक उल्टी का कारण बन सकता है। साथ ही एक घंटे के भीतर उंगली में सूजन, तीव्र दर्द, बेचैनी आदि की शिकायत होने लगती है। इसे ठीक होने में 24 घंटे तक समय लग सकता है। इसके डंक से कभी-कभी आधा घंटे के अंदर कुत्ते या बिल्ली की मौत हो सकती है। दीपक के अनुसार आम तौर पर यह अपने जहर का उपयोग शिकार करने में करती है। ये मकड़ियां मुख्य रूप से कीड़ों और अन्य मकड़ियों सहित जमीन में रेंगने वाले छोटे जीवों को खाती हैं। जेकॉस, स्किंक और मेढक जैसे छोटे जीव इसका आहार का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका व कई अन्य देशों में इसे पाला भी जाता है।

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