GAUSHALA

!! मातर: सर्व भूतानां, गाव: सर्व सुखम् प्रदा !!
श्री गोपाल गोशाला

स्थापना सन् १९१८, श्री गोपाल गोशाला नवगछिया बाजार के गो-प्रेमी बंधुओं के द्वारा की गयी थी| गो-प्रेमी बंधुओं के द्वारा प्रदत्त वृत्ति से गोशाला का चतुर्दिक विकाश हुआ| गोशाला परिसर के पीछे लगभग ११ बीघा जमीन का एक चकला, बाजार के उत्तर मक्खातकिया में १५ बीघा ११ कट्ठा जमीन एवं कोशी पार मधेपुरा जिलान्तर्गत लौवालगाम में ११० बीघे का एक चकला बतौर चारागाहअ अर्जित किया गया| गोशाला के पक्के भवन, गायों के रहने हेतु बड़े-बड़े पक्के शेड एवं भूसा व अनाजों के रखने हेतु बड़े- बड़े गुदामों का निर्माण हुआ|

मक्खातकिया के जमीन पर अ-दुधारू पशुओं के रखने हेतु पक्के का शेड का निर्माण हुआ| दोनों जगहों पर सिंचाई हेतु पम्पिंग सेट की व्यवस्था की गयी| गोबर गैस प्लांट लगवाया गया| गोशाला परिसर में एक बड़े हीं सुन्दर शिवालय एवं मनोरम तालाब का निर्माण हुआ| गोशाला के उत्कर्ष काल में यहाँ लगभग ३०० गायें हुआ करती थीं| माता की अच्छी देख-रेख व सेवा थी| अच्छी मात्रा में दूध की उपलब्धता थी| दुग्ध-उत्पादन के साथ श्री गोपाल गोशाला स्थापना का मूल उद्देश्य वृद्ध एवं लाचार गौ माताओं का संरक्षण व सेवा भी था| श्री गोपाल गोशाला का सुदिन आया गौ माता के आर्त्त से ही आर्ष परम्परा के संवाहक श्रद्धेय बाल-व्यास श्रीकांत शर्मा जी का गोपाष्टमी दिनांक २५-१० ०९ को नवगछिया आगमन हुआ| गौ-पूजा हेतु श्री गोपाल गोशाला आये|गोशाला की दारुण स्थिति को अपने कथा मंच से व्यक्त किया कि यह कैसी गोशाला है जहाँ पूजा करने के लिए एक भी गाय नहीं है|

पूज्य श्रीकान्त जी शर्मा गोशाला देखने पुनः ६ जनवरी २०१० को आये|यहाँ का परिवर्तन देख अति आश्चर्यचकित हो गये – क्या यह वही गोशाला है जो दो माह पूर्व थी? आपने अपनी इच्छापूर स्थित गोशाला से एक ट्रक गाय व एक ट्रक बछड़े देने की घोषणा की है| गोशाला की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराना सरकार का दायित्व है| गोशाला के विकास हेतु अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है| दाताओं का स्वागत है|दान-राशि के सदुपयोग का विश्वास दिलाया जा सकता है| गो-माता की सेवा व संरक्षा हेतु कमिटि के सभी सदस्य प्रतिबद्ध है|

• अनुमंडल पदाधिकारी, सह-अध्यक्ष
• पवन कुमार सर्राफ, उपाध्यक्ष, 9934443737
• रामप्रकाश रूंगटा, सचिव, 9431214416